Is parenting a burden or a blessing? This heartfelt reflection captures the depth, sacrifice, and beauty of raising children. It reminds us that while not everyone is meant for this journey, those who embrace it find a kind of love that redefines life itself.

किसी ने कहा,
वक़्त की बर्बादी है उनके लिए…
बच्चे पैदा कर उन्हें पालना।
जब सुना, तो समझ न आया,
मैं इसके फ़ेवर में हूँ… या अगेंस्ट में।
वाक़ई, बहुत मुश्किल है बच्चों को पालना।
ना जाने कितनी रातें जागना पड़ता है,
शदीद नींद में हो… तब भी उठना पड़ता है।
तुम्हारी ख़्वाहिशें, भले ही पूरी न हों,
पर उनके लबों पर मुस्कराहट बनी रहे
इस बात का ख़याल रखना पड़ता है।
अब सिर्फ़ तुम दो नहीं रहे
जो पहले की तरह वक़्त मिले
हमसफ़र के साथ रह कर भी,
कभी-कभी साथ नहीं मिलता
तुम्हारी बहुत सी ख़्वाहिशें क़ैद हो जाती हैं,
ज़िंदगी उनके हिसाब से ढल जाती है।
उनकी तबीयत ख़राब न हो इस लिए ट्रिप्स अब कम बनते हैं,
उनका स्कूल मिस न हो जाए
इसलिए पूरा शेड्यूल उन्हीं के हिसाब से चलता है।
और जब वो छोटे होते हैं,
और किसी दिन सुकून की तलब हो,
तो मन मसोस कर सी ख़्वाहिश को रद्द करना पड़ता है।
हर वक़्त ज़ेहन में सिर्फ़ एक ही ख़याल रहता है...
वो क्या कर रहे हैं… किसके साथ…
क्या खा रहे हैं… कहीं बिगड़ तो नहीं रहे?
और ये ख़याल
ज़िंदगी भर बना रहता है।
बच्चे चाहे जितने भी बड़े क्यों न हो जाएं,
ये फ़िक्र ज़ेहन में बसा रहता है।
बच्चे पालना आसान नहीं,
तुम्हें हर रोज़ ख़ुद को उनके साँचे में ढालना पड़ता है।
पर…
माँ-बाप बनने की ख़ुशी
वही महसूस कर सकता है जो सच में माँ-बाप बनना चाहता है।
ज़िंदगी कितनी मुतमइन हो जाती है उनके आने से,
ये उनके आने के बाद ही पता चलता है।
उनकी मासूम मुस्कराहट,
बेलौस मोहब्बत,
गूंजती किलकारियाँ
तुम्हारे लबों पर सुकून दे जाती हैं।
ज़िंदगी कितनी अधूरी थी पहले
ये तब समझ आता है,
जब नाज़ुक सी नन्हीं उंगली,
पहली बार तुम्हारी उंगली पकड़ती है।
जब पहली बार कोई तुम्हें "पापा" या "मम्मा" कहता है,
जब पहली बार वो तुम्हें अपनी बाँहों में लेने की कोशिश करता है।
ज़िंदगी कितनी ख़ूबसूरत हो सकती है
ये बात उस वक़्त समझ आती है।
उनके साथ वक़्त बिताने को जी करता है,
कहीं भी हो हर वक़्त उन्हीं का ख़याल रहता है।
और जब तुम थक कर काम से घर आते हो,
तो उनका दौड़ कर तुमसे लिपट जाना…
और कहना
"पापा, कहाँ थे आप? मैंने आपको मिस किया…"
पूरे दिन की थकन मिटा देता है।
हाँ
बच्चे पालना बहुत मुश्किल है,
पर उनका साथ होना ज़िंदगी को नए राह दिखाता है।
ये ने’मत है रब की
सबको नसीब नहीं होती।
पर अगर तुम्हें लगता है
बच्चे तुम्हारी कमज़ोरी बन सकते हैं,
तो उन्हें लाना ज़रूरी नहीं।
वो वक़्त माँगते हैं
वो मोहब्बत माँगते हैं
वो साथ चाहते हैं
वो तुम्हारी ज़िंदगी चाहते हैं।
ज़रूरी नहीं
कि तुम इस क़ाबिल हो जो इस ज़िम्मेदारी को निभा पाओ।
बच्चे पैदा करना तो आसान है
पर माँ-बाप बनना मुश्किल।
इसलिए अगर तुझे लगता है
बच्चे पैदा करना वक़्त की बर्बादी है
तो तेरे लिए तू सही सोच रहा है।
Naseema Khatoon
IS PARENTING A BURDEN OR A BLESSING?
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